आज द्रौपदी मुर्मू लेंगी 15 वें राष्ट्रपति पद की शपथ, दी जाएगी 21 तोपों की सलामी, पढ़िए पूरी ख़बर

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नई दिल्ली/स्वराज टुडे: द्रौपदी मुर्मू आज सोमवार को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की शपथ लेंगी। वह देश की 15वीं राष्ट्रपति बनेंगी। वह आजादी के बाद पैदा होने वाली पहली और शीर्ष पद पर काबिज होने वाली सबसे कम उम्र की राष्ट्रपति होंगी।

प्रधान न्यायाधीश एनवी रमणा दिलाएंगे राष्ट्रपति पद की शपथ

देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनने का गौरव श्रीमती प्रतिभा पाटिल के नाम दर्ज है । द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति बनने वाली देश की दूसरी महिला हैं। शपथ ग्रहण समारोह सोमवार को सुबह करीब सवा 10 बजे संसद के केंद्रीय कक्ष में होगा, जहां प्रधान न्यायाधीश एनवी रमणा उन्हें राष्ट्रपति पद की शपथ दिलाएंगे। इसके बाद द्रौपदी मुर्मू को 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। इसके बाद राष्ट्रपति का संबोधन होगा। समारोह से पहले, निवर्तमान राष्ट्रपति और निर्वाचित राष्ट्रपति संसद पहुंचेंगे। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मंत्रिपरिषद के सदस्य, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राजनयिक मिशनों के प्रमुख, संसद सदस्य और सरकार के प्रमुख असैन्य एवं सैन्य अधिकारी समारोह में शामिल होंगे।

आज से द्रौपदी मुर्मू का नया आशियाना ‘राष्ट्रपति भवन’

संसद के केंद्रीय कक्ष में समारोह के समापन पश्चात राष्ट्रपति, ‘राष्ट्रपति भवन’ के लिए रवाना होंगी, जहां उन्हें एक ‘इंटर-सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया जाएगा और निवर्तमान राष्ट्रपति का शिष्टाचार सम्मान किया जाएगा। बता दें कि मुर्मू ने गुरुवार को विपक्षी दलों के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को हराकर इतिहास रचा था। मुर्मू को सांसदों और विधायकों के 64 प्रतिशत से अधिक वोट मिले और उन्होंने भारी मतों के अंतर से चुनाव जीता। मुर्मू को सिन्हा के 3,80,177 वोटों के मुकाबले 6,76,803 वोट मिले।

’25 जुलाई’ को शपथ ग्रहण करने वालीं 10वीं राष्ट्रपति होंगी मुर्मू

द्रौपदी मुर्मू 25 जुलाई को शपथ लेने वाली देश की 10वीं राष्ट्रपति होंगी। एक रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 1977 से लगातार राष्ट्रपतियों ने 25 जुलाई को शपथग्रहण की है। भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 26 जनवरी 1950 को शपथ ली थी। 1952 में उन्होंने पहला राष्ट्रपति चुनाव जीता। राजेंद्र प्रसाद ने दूसरा राष्ट्रपति चुनाव भी जीता और मई 1962 तक इस पद पर रहे। सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने 13 मई, 1962 को राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और वह 13 मई, 1967 तक इस पद पर रहे। दो राष्ट्रपति – जाकिर हुसैन और फखरुद्दीन अली अहमद – अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके क्योंकि उनका निधन हो गया था। भारत के छठे राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने 25 जुलाई 1977 को शपथ ली। तब से 25 जुलाई को ज्ञानी जैल सिंह, आर. वेंकटरमण, शंकर दयाल शर्मा, के.आर. नारायणन, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, प्रतिभा पाटिल, प्रणब मुखर्जी और रामनाथ कोविंद ने इसी तिथि को राष्ट्रपति पद की शपथ ली।

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की पहली आदिवासी राष्ट्रपति

आजाद भारत के 75 साल के इतिहास में पिछले डेढ़ दशक को महिलाओं के लिए खास तौर से विशिष्ट माना जा सकता है। जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने वाली महिलाएं इस दौरान देश के शीर्ष संवैधानिक पद तक पहुंचने में कामयाब रहीं और 2007 में प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनने का गौरव हासिल करने के बाद अब द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्रपति बनना देश की लोकतांत्रिक परंपरा की एक सुंदर मिसाल है। क्या कभी किसी ने सोचा था कि दिल्ली से दो हजार किलोमीटर के फासले पर स्थित ओडिशा के मयूरभंज जिले की कुसुमी तहसील के छोटे से गांव उपरबेड़ा के एक बेहद साधारण स्कूल से शिक्षा ग्रहण करने वाली द्रौपदी मुर्मू एक दिन असाधारण उपलब्धि हासिल करके देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर विराजमान होंगी और देश ही नहीं दुनिया की बेहतरीन इमारतों में शुमार किया जाने वाला राष्ट्रपति भवन उनका सरकारी आवास होगा। द्रौपदी मुर्मू देश की पहली आदिवासी राष्ट्रपति होंगी.

पारंपरिक संथाली साड़ी पहन कर शपथ ग्रहण कर सकती हैं मुर्मू

द्रौपदी मुर्मू सोमवार को पारंपरिक संथाली साड़ी पहन कर शपथ ग्रहण कर सकती हैं। मूर्मू की भाभी सुकरी टुडू पूर्वी भारत में संथाल समुदाय की महिलाओं द्वारा पहनी जाने वाली एक खास साड़ी लेकर दिल्ली आ रही हैं। सुकरी अपने पति तारिणीसेन टुडू के साथ संसद के केंद्रीय कक्ष में होने वाले शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए शनिवार को राष्ट्रीय राजधानी के लिए रवाना हो गईं। सुकरी ने कहा, ‘मैं दीदी के लिए पारंपरिक संथाली साड़ी ला रही हूं और उम्मीद करती हूं कि वह शपथ ग्रहण समारोह के दौरान इसे पहनेंगी। मुझे अभी पता नहीं है कि वह असल में इस अवसर पर क्या पहनेंगी। राष्ट्रपति भवन नए राष्ट्रपति की पोशाक का फैसला लेगा।’ संथाली साड़ियों के एक छोर में कुछ धारियों का काम होता है और संथाली समुदाय की महिलाएं इसे खास मौकों पर पहनती हैं।। संथाली साड़ियों में लम्बाकार में एक समान धारियां होती हैं और दोनों छोरों पर एक जैसी डिजाइन होती है।

फर्श से अर्श तक का सफर

द्रौपदी मुर्मू के पारिवारिक जीवन की बात करें तो उनका जन्म 20 जून 1958 को ओडिशा के मयूरभंज जिले के बैदापोसी गांव में एक संथाल परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम बिरंचि नारायण टुडु है। उनके दादा और उनके पिता दोनों ही उनके गांव के प्रधान रहे। मुर्मू मयूरभंज जिले की कुसुमी तहसील के गांव उपरबेड़ा में स्थित एक स्कूल से पढ़ी हैं। यह गांव दिल्ली से लगभग 2000 किमी और ओडिशा के भुवनेश्वर से 313 किमी दूर है। उन्होंने श्याम चरण मुर्मू से विवाह किया था। अपने पति और दो बेटों के निधन के बाद द्रौपदी मुर्मू ने अपने घर में ही स्कूल खोल दिया, जहां वह बच्चों को पढ़ाती थीं। उस बोर्डिंग स्कूल में आज भी बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। उनकी एकमात्र जीवित संतान उनकी पुत्री विवाहिता हैं और भुवनेश्वर में रहती हैं। द्रौपदी मुर्मू ने एक अध्यापिका के रूप में अपना व्यावसायिक जीवन शुरू किया और उसके बाद धीरे-धीरे सक्रिय राजनीति में कदम रखा। साल 1997 में उन्होंने रायरंगपुर नगर पंचायत के पार्षद चुनाव में जीत दर्ज कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। उपरबेड़ा गांव के एक साधारण आदिवासी परिवार से आने वाली 64 वर्षीय मुर्मू ने भारत का राष्ट्रपति बनने तक पार्षद से लेकर मंत्री और झारखंड के राज्यपाल पद तक का लंबा सफर तय किया है। उनके राष्ट्रपति बनने पर दुनियाभर के नेताओं ने इसे भारतीय लोकतंत्र की जीत करार दिया है।

 

दीपक साहू

संपादक

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