नई दिल्ली/स्वराज टुडे: संकट कटे मिटे सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा… हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए एक युवती ने एम्स में अपने ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी कराई है। ऑपरेशन की पूरी प्रक्रिया के दौरान वह होश में थी। उसके साथ अस्पताल के न्यूरो विभाग के डॉक्टर भी चालीसा का पाठ कर रहे थे। महिला को चार दिन पहले अस्पताल में भर्ती किया गया था। आज शनिवार को उन्हें छुट्टी दे दी जाएगी।

न्यूरो सर्जन डॉक्टर दीपक गुप्ता ने कहा-बिना बेहोश किए भी संभव है ऑपरेशन

एम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर दीपक गुप्ता ने बताया कि दिल्ली के शाहदरा इलाके की रहने वाली 24 साल की एक महिला मरीज के सिर के विभिन्न हिस्सों में ट्यूमर था। इसके लिए उसकी सर्जरी की गई। सबसे पहले उसके सिर के ऊपरी हिस्से की नस को सुन्न कर दिया गया, ताकि चीरा लगाने पर दर्द न हो।

इसके बाद सिर के अंदर नसों की अलग-अलग रंगों से र्कोंडग की गई, जिसे ट्रेक्टोग्राफी कहते हैं। इस आधुनिक तकनीक से ऑपरेशन करने में एक तरफ ब्रेन को कम से कम नुकसान होता है वहीं दूसरी तरफ सिर में दर्द नहीं होता है। ऐसे में मरीज को बिना बेहोश किए भी सर्जरी की जा सकती है।

कई बार सामान्य ब्रेन ट्यूमर सर्जरी में मरीज को बेहोश कर दिया जाता है, लेकिन इससे सर्जरी के दौरान उसके मस्तिष्क के स्पीच एरिया पर पड़ रहे प्रभाव की निगरानी नहीं की जा सकती। लेकिन इस तकनीक (अवेक ब्रेन सर्जरी) से मरीज की बोलने की क्षमता को सर्जरी के दौरान बार-बार जांचा जा सकता है। इसी क्षमता को जांचने के लिए हम चाहते थे कि मरीज से कुछ बुलवाया जाए। ऐसे में धार्मिक लोगों के लिए हनुमान चालीसा से बेहतर और क्या हो सकता था।

पहले भी हुई है ऐसी सर्जरी

डॉक्टर दीपक गुप्ता ने बताया कि दिमाग को बेहोश किए बिना दिमाग की सर्जरी सालों से हो रही हैं। वे खुद अब तक 100 से अधिक ऐसी सर्जरी कर चुके हैं। उन्होंने बताया कि मरीज अपनी आस्था के हिसाब से सर्जरी के दौरान कुछ भी पढ़ सकता है ताकि उसे शांति मिले। कई मरीजों ने आस्था के आधार पर हनुमान चालीसा पढ़ी है तो कई ने कुरान की आयतें भी पढ़ी हैं।