छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षाओं के पैटर्न में किया संसोधन, प्रदेश के विद्यार्थी जान लें यह नियम

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छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: छत्तीसगढ़ के स्कूलों में शिक्षा विभाग फिर से एक प्रयोग कर रहा है। स्कूलों में हर महीने परीक्षा कराने की तैयारी है। इस परीक्षा को मासिक आकलन नाम दिया गया है। पूरे सत्र के दौरान छह मासिक आकलन होने हैं। तिमाही, छमाही और वार्षिक आकलन इसके अतिरिक्त होगा। इस आकलन में अंक और ग्रेडिंग भी दी जानी है।

प्रदेश के स्कूलों में अब हर महीने परीक्षा

स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से आकलन के लिए निर्धारित कैलेंडर के अनुसार कक्षा पहली से 12वीं के लिए पहला मासिक आकलन जुलाई में होना है। दूसरा आकलन अगस्त में, तीसरा अक्टूबर में, चौथा नवम्बर में, पांचवां जनवरी में और छठवां आकलन फरवरी में किया जाएगा। इसी बीच सितम्बर महीने में तिमाही परीक्षा होगी। दिसम्बर में छमाही और मार्च महीने में वार्षिक परीक्षा या आकलन आयोजित होगा।

कक्षा पहली से पांचवी तक आकलन 50-50 अंकों का 

कक्षा पहली से पांचवीं तक यह आकलन 50-50 अंकों का होगा। वहीं कक्षा 6ठवीं से 12वीं तक 100-100 अंक का होगा। अधिकारियों ने बताया, जुलाई और अगस्त के मासिक आकलन के लिए कक्षा पहली से आठवीं तक के प्रश्न पत्र राज्य का सैंपल शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) उपलब्ध कराएगा।

वहीं कक्षा 9वीं से 12वीं तक सैंपल प्रश्न पत्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की ओर से उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें मॉडल आंसर भी होगा। दूसरे महीनों के प्रश्न पत्र सैम्पल प्रश्न पत्र के अनुरूप निर्धारित पाठ्यक्रम एवं ब्लू प्रिंट के आधार पर शिक्षक स्वयं बनाएंगे। SCERTइसके लिए कक्षावार, विषयवार प्रश्न बैंक भी उपलब्ध कराएगा।

मासिक आकलन के लिए अलग अंक प्रणाली

स्कूल शिक्षा विभाग के मुताबिक मासिक आकलन प्रत्येक विषय के लिए 25 अंक का होगा। जिसमें कक्षा तीसरी से आठवीं तक 20 अंक लिखित एवं 05 अंक प्रायोगिक या प्रोजेक्ट कार्य पर होंगे। कक्षा पहली एवं दूसरी के लिए 15 अंक लिखित और 10 अंक प्रायोगिक, प्रदत्त कार्य(असाइनमेंट) या प्रोजेक्ट कार्य के होंगे। प्रायोगिक, प्रदत्त कार्य, सर्वे कार्य, प्रोजेक्ट कार्य के लिए आवश्यकतानुसार बच्चों को 2 से 3 दिन का समय दिया जाएगा। समस्त आकलन के प्रति ब्लू प्रिंट के अनुरूप एलओएस आधारित वस्तुनिष्ठ, अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय बनाए जाएंगे।

हर महीने अभिभावकों को भी दिखाया जाएगा परिणाम

विभाग के निर्देशों के मुताबिक मासिक आकलन प्रत्येक महीने के अंतिम सप्ताह में किया जाएगा। अगले महीने के प्रथम सप्ताह में विद्यार्थियों और उनके पालकों को आकलन परिणाम एवं प्रगति पत्र दिया जाएगा। प्रत्येक महीने इस प्रगति पत्र पर पालकों से हस्ताक्षर भी कराए जाएंगे। मासिक आकलन लगातार पांच दिन संबंधित विषय की घंटे में ही होगा। जहां तक संभव हो एक दिन में केवल एक विषय की ही परीक्षा ली जाएगी।

टेस्ट के अंकों के आधार पर कक्षा में रैंक बनेगी

योजना है कि कक्षा पहली से पांचवीं तक के विद्यार्थियों के प्रगति पत्रक में केवल ग्रेड लिखा जाएगा। कक्षा 6ठवीं से 8वीं तक विद्यार्थियों के प्रगति पत्रक में विषयवार अंक, ग्रेड एवं प्रतिशत होंगे। इसके अतिरिक्त रैंक (कक्षा में स्थान) भी दिया जाएगा। कक्षा में स्थान अंक के आधार पर न देकर ग्रेड के आधार पर दिया जाएगा। कक्षा 9वीं से 12 वीं तक के बच्चों के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल से निर्धारित अंक योजना का उपयोग किया जाएगा।

बहरहाल स्कूल शिक्षा विभाग कि यह योजना एक सराहनीय पहल है लेकिन देखना होगा कि धरातल पर इसका कितना सार्थक परिणाम सामने आता है । बता दें कि शिक्षाविदों द्वारा लंबे समय से एक देश एक शिक्षा नीति की मांग की जा रही है ताकि देश का हर वर्ग का बच्चा समान रूप से शिक्षा ग्रहण कर सके लेकिन केंद्र सरकार ने अब तक इस पर कोई विचार किया है ऐसा प्रतीत नहीं होता ।

दीपक साहू

संपादक

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