देश मैं शांति बनाए रखने के लिए नक्सलियों (Naxalite) ने छत्तीसगढ़ सरकार को बातचीत का ऑफर दिया है।

इस ऑफर के साथ ही माओवादियों ने वे शर्तें भी बताई हैं, जिनके पूरा होने पर वे शांति के लिए तैयार हो सकते हैं।

नक्सलियों ने पहली बार सरकार को दिया शांति वार्ता का प्रस्ताव 

देश की शांति के लिए लंबे वक्त से नासूर बनी हुई नक्सल समस्या (Naxalite) का समाधान होने की उम्मीद जगी है। नक्सलियों की खूंखार दंडकारण्य जोनल कमेटी ने पहली बार सरकार को शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया है। नक्सलियों ने अपने इस प्रस्ताव के साथ कई शर्तें भी लगाई हैं। नक्सलियों का कहना है कि अगर सरकार उनकी मांग मान लेती है तो वह बातचीत के लिए तैयार हो सकते हैं।

इन शर्तों पर बस्तर की दंडकारण्य जोनल कमेटी ने दिया है प्रस्ताव

नक्सलियों (Naxalite) की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (Maoist Dandakaranya Zonal Committee) की ओर से जारी लिखित बयान में कहा गया है कि वे वार्ता के लिए तैयार हैं। बस सरकार इसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार करे। माओवादियों ने शांति वार्ता शुरू करने के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) के सामने कुछ शर्तें भी रखी हैं।

इनमें माओवादी पार्टी, PLGA और अन्य संगठनों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने, कथित हवाई हमलों को पूरी तरह बंद करने और बस्तर एरिया में स्थापित सुरक्षाबलों के कैंपों को हटाकर जवानों को वापस भेजने की मांग शामिल है। नक्सलियों का कहना है कि अगर सरकार इन सभी शर्तों को मान लेती है तो वे शान्ति वार्ता कर सकते हैं।

बातचीत के ऑफर पर उठ रहे हैं कई सवाल

माओवादियों (Maoist) की ओर से दिए गए इस शांति प्रस्ताव पर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या ऐसा तो नहीं है कि तेजी से खत्म हो रही अपनी शक्ति को दोबारा से बटोरने के लिए नक्सली शांति का चोला ओढ़ने की कोशिश कर रहे हों। यह भी आशंका जताई जा रही है कि नक्सली फिर से किसी बड़ी वारदात की फिराक में हैं, इसलिए शांति वार्ता का ऑफर देकर सरकार और सुरक्षाबलों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।

नक्सलियों ने मंत्री कवासी लखमी को दी धमकी

सुरक्षाबलों की आशंका की वजह भी सामने आ गई है। दरअसल नक्सलियों (Maoist) ने छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्री कवासी लखमा को धमकी जारी की है। नक्सलियों का आरोप है कि कवासी लखमा आदिवासी संस्कृति का हिंदुकरण कर रहे है।  माओवादियों ने लखमा पर आदिवासियों के दमन और देशी-विदेशी पूंजीपतियों के साथ सांठगांठ कर बस्तर की प्राकृतिक संपदा को बेचने का भी आरोप लगाया है। नक्सलियों ने बस्तर के जंगलों में पोस्टर जारी करवाकर आदिवासियों से लखमा के सभी कार्यक्रमों का बहिष्कार करने की अपील की है।

आखिर क्या साजिश रच रहे हैं माओवादी?

ऐसे में माना जा रहा है कि प्रदेश सरकार के मंत्री को धमकी और शांति वार्ता का ऑफर, दोनों आने वाले दिनों में किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है। फिलहाल छत्तीसगढ़ या केंद्र सरकार ने नक्सलियों (Maoist) के प्रस्ताव का कोई जवाब नहीं दिया है। दोनों सरकारें इस मामले में नक्सलियों की गंभीरता और उनकी किसी संभावित साजिश का पता लगाने में जुटी हैं। अगर नक्सलियों का प्रस्ताव वाकई ठोस पाया जाता है तो सरकार इस मामले में आगे बढ़ने की पहल कर सकती है।


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