महिला अपराध क़ानून के सत्य तथ्य एवं बचाव- अधि. हिना यास्मीन खान

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छत्तीसगढ़
रायपुर/स्वराज टुडे: आई॰पी॰सी॰ की कुछ धाराएँ महिलाओं पर होने वाले शारीरिक एवं मानसिक अपराधों पर उन्हें सुरक्षा कवच देती हैं । यह धाराएँ मुख्य रूप से 354, 376, 498A , 509 हैं, लेकिन कभी कभी यह संवाद भी सुनने में आता है कि इन धाराओं का ग़लत इस्तेमाल किया जाता है । आज हम इन्ही धाराओं और उनसे जुड़ी वास्तविकताओं पर बात करेंगे ।

जानिए किस अपराध के लिए कौन सी धाराएं 

IPC की धारा 354, 509 जहां स्त्री की लज्जा के सम्मान से जुड़ी है वहीं 498 A महिला के पति एवं ससुराल वालों के द्वारा महिला के प्रति जानबूझकर की गई क्रूरता एवं किसी सम्पत्ति के लिए विधिविरुद्ध माँगो के लिए उसे तंग करना है तो 376 महिला के साथ होने वाले बलात्कार को बताती है।
इन अपराधों में अभियोजित व्यक्ति के द्वारा सदैव ही स्वयं को निर्दोष बताया जाता है लेकिन विवेचना के द्वारा उन्हें आरोपी बता तमाम सबूत ओर गवाह के साथ चार्जशीट कोर्ट में पेश कर दी जाती है । जिस के बाद न्यायलय में पैरवी प्रारम्भ होती है , जहां सरकारी वकील मामले को साबित कर आरोपी को अपराधी बनाने का कार्य प्रारम्भ करता है ।

आई॰पी॰सी॰ की धारा 354, 509 स्त्री की लज्जा से जुड़े होते हैं जिसमें आशय का महत्व सर्वोपरि होता है . अभियोजित व्यक्ति का उस स्त्री का सम्बंध , उठना बैठना , फ़ोन आदि से चर्चा जिसमें प्रेम निवेदन ,सुंदरता की प्रशंसा , अपने मित्रों , परिवार के साथ इस विषय में चर्चा , उसके साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समीपता उसकी अरुचि के पश्चात भी उससे सम्पर्क बनाने का प्रयास, उसके शरीर को छूना या छूने का प्रयास करना, इन सब घटनाओं को किसी के द्वारा देखा जाना या सुना जाना वो साक्ष्य होते हैं ,जो उसे उस स्त्री के द्वारा शिकायत किए जाने पर अभियोजित करने में मदद करते हैं ।

354, 509 से बचाव

अनावश्यक महिला मित्रता से बचे । यदि है तो सम्बन्धों में पारदर्शिता एवं स्पष्टता रखें ।  प्रयास करें कि घूमने फिरने समूह में ही जाएँ । स्त्री के साथ शिष्ट , संयमित भावनाओं का व्यवहार करें । यदि मित्रता पवित्र है तब इस सम्न्ब्ध के सबूत सम्भाल कर रखें । अनावश्यक बातचीत से बचें ।

महिलाएं कब दर्ज कराती हैं 498 A का मामला

इसी प्रकार आई॰पी॰सी॰ की धारा 498A से जुड़े अपराधों में लड़की के पति या नाते दारों द्वारा जानबूझकर किया गया आचरण जिससे उसे आत्महत्या करने या जीवन ,अंग या स्वास्थ्य के प्रति गम्भीर क्षति या ख़तरा करना या किसी मूल्यवान सम्पत्ति या प्रतिभूति के लिए विधिविरुद्ध माँगो के लिए प्रताडित करना है । इसके अंतर्गत लड़की के साथ पति एवं परिवार वालों का अनुचित आचरण, उसके साथ किए गए बुरे व्यवहार , उसे कलंकित किए जाने वाले ताने कटाक्ष , रूप रंग पर दोषारोपण , संतान ना होने की अवस्था में बाँझ कहना या बदसूरत , मोटी शब्द का इस्तेमाल , उसकी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति ना करना, पति का रखैल रखना , पति का सहवास से इनकार करना , पैसों की माँग करना अभियोजित करने के आधार एवं सबूत होते हैं ।

498 A के मामले में बचाव

यदि पत्नी का आचरण पति एवं परिवार वालों के लिए सही नही है तथा वह बात बात में पुलिस की धमकी देती है तब इस सम्बंध में लिखित सूचनाओं पुलिस को अवश्य देवे । साथ ही समाज प्रमुखों को इस सम्बंध में लिखित में बताएं। धमकी की चैट या विडियो यदि है तो सम्भाल कर रखे तथा बचाव में दे । स्वस्थ बातचीत से मसले का हल निकालें।

IPC की धारा 376

अंत में आई॰पी॰सी॰ की धारा 376के अंतर्गत अपराध में स्त्री के बलात्कार को कहते हैं . जिसके अंतर्गत लड़की का अपराधी से सम्बंध , उसकी सतीत्व विच्छेद की चिकित्सा परीक्षा ,शरीर पर आरोपी तथा पीड़िता को आई चोट, उसका कथन, जिसमें मुख्यतः शादी करने का झाँसा दे कर उसके साथ शारीरिक सम्बंध बनाते रहना , प्रेम सम्बंध में छायाचित्, फ़ोन से चैट , msg करना , इस सम्बंध को जानने वाले दोस्त या रिश्तेदार मुख्य प्रमाण होते हैं ।

दैहिक शोषण के आरोप से बचने के उपाय

किसी भी अनैतिक सम्बन्धों से बचे । महिला मित्र के सम्बन्धों में संदिग्धता होने पर सतर्क रहे एवं कहीं भी उसके साथ अकेले आने जाने से बचे । यदि अकेले निवास करते है तब महिला कर्मी को घर में आने से विरत रखे । यदि आवश्यक हो तो घर में CCTV केमरा लगा कर रखें ।
यदि कोई पुरुष इन अपराधों में अभियोजित किया जाता है एवं यदि वह दोषी नही तो उसका यह दायित्व होता है कि वह विवेचना कार्यवाही में पुलिस को पूरा सहयोग दे । वह सभी साक्ष्य जो उसे निरपराध बताए  उसे प्रस्तुत करे

हिना यास्मीन खान
ज़िला अभियोजन अधिकारी, रायपुर

दीपक साहू

संपादक

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