छत्तीसगढ़
गरियाबंद/स्वराज टुडे: तीन काले किसान विरोधी कानूनों की आज बरसी पर जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष राकेशतिवारी ने कहा कि मोदी सरकार अहंकार का त्यागकर कृषि कानूनों को वापस लें। आज इन काले कानूनों की बरसी पर मोदी सरकार को चाहिए कि वो देश के किसानों के संघर्ष का सम्मान करते हुये अपने निर्णय को वापस लेने की घोषणा करें। इन किसान विरोधी कानूनों को फौरन खारिज करे।
आगे और कहा कि जब भी ‘देश की जनता’ की अदालत में मोदी सरकार की किसानों पर की गयी ‘क्रूरताऔर बर्बरता’ का मुकदमा चलेगा तब 500 से अधिक किसानों की शहादतें, लाखों किसानों की राह में बिछाए गए ‘कील और काँटे’, महीनों सड़कों पर पड़े रहने की वेदनाएं और 62 करोड़ किसान-मजदूरों की असहाय पीड़ा मोदी सरकार के किसान विरोधी चरित्र का जीता जागता सबूत बनेंगी। प्रजातंत्र के देवता-देश की जनता का ऐसा फैसला होगा।

5 जून को हुई थी नए कृषि अधिनियम की घोषणा
मोदी सरकार तीन क्रूर काले कृषि अध्यादेश आज ही के दिन 5 जून, 2020 को लेकर आई थी।
मोदी कोरोना महामारी की आपदा के समय वे इन काले कानूनों से अपनी उद्योगपति मित्रों के लिये अवसर बनाते रहे हैं।
इन काले कानूनों में भाजपा सरकार ने अपने पूँजीपति दोस्तों के लिए अनाज का भंडारण, जमाखोरी, कालाबाजारी करने की कानूनी छूट लिख दी और किसानों के हिस्से में लाठीचार्ज,पानी की बौछार और आँसू गैस के गोलों की ‘प्रताड़ना’लिख दी।
इन तीनों काले कानूनों से मोदी ने अपने पूँजीपति दोस्तों के लिए मनमाने दामों पर फसलों को खरीदने का ‘इनाम’तय दिया और किसान भाइयों के भविष्य को रौंद कर अनाज मंडी और समर्थन मूल्य की व्यवस्था की समाप्ति का रास्ता खोलेने का प्रयास कर दिया।
इन काले कानूनों से मोदी सरकार कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के अनैतिक प्रावधानों के माध्यम से किसानों को कुछ पूँजीपतियों का ‘बंधुआ मज़दूर’ बनाना चाहती है। 2014 में बनी, मोदी सरकार को कुछ पूँजीपतियों ने सत्ता पर बिठाया था,वो आज किसानों को बर्बाद और तबाह कर उनका कर्ज अदा कर रही है।

मोदी सरकार के किसान विरोधी चरित्र पर तीखा हमला करते हुए राकेश तिवारी ने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही 2014 में अध्यादेश के माध्यम से किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश की।
2015 में सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र दे दिया कि किसानों को लागत + 50 प्रतिशत मुनाफा कभी भी समर्थन मूल्य के तौर पर नहीं दिया जा सकता।
खरीफ 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लेकर आए,जिससे चंद बीमा कंपनियों ने 26,000 करोड़ रु. का मुनाफा कमाया।
अपने पूंजीपती मित्रों का तो लगभग दस लाख करोड़ का कर्ज माफ कर दिया पर किसानों की कर्जमाफी के से अपना मुंह मोड़ लिया।
रही सही जो कसर बची थी,वो डीज़ल पर 820 प्रतिशत एक्साईज़ ड्यूटी बढ़ा तथा खेती पर टैक्स लगा पूरी कर दी। 73 साल के इतिहास में देश में पहली बार खाद पर 5 प्रतिशत, कीटनाशक दवाई पर 18 प्रतिशत, ट्रैक्टर व खेती के उपकरणों पर 12 प्रतिशत जीएसटी टैक्स लगा डाला।
अंत में राकेश तिवारी ने कहा कि 5 जून,2020 को तीन काले कानूनों के माध्यम से किसानों की आजीविका पर  डाका डालने की साजिश रची गयी जो नाकाम होकर रहेगी।