छत्तीसगढ़
महासमुंद/स्वराज टुडे: जिले में शिक्षा विभाग के हालात कुछ ठीक नजर नहीं आ रहे हैं। 4 महीने पहले यहां के प्रभारी DEO को बहुचर्चित अश्लील वीडियो कांड के मामले में सस्पेंड कर दिया गया था। वहीं अब ऐसे ही एक मामले में महासमुंद जिला अंतर्गत बागबाहरा विकासखंड में तैनात एक शिक्षिका को जिला शिक्षा अधिकारी ने सस्पेंड कर दिया है।

कोमाखान क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्राइमरी स्कूल पतेरापाली में तैनात शिक्षिका के ऊपर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए थे। जिसके बाद शिक्षिका के खिलाफ जिला शिक्षा धिकारी ने कार्रवाई की है ।

शिक्षिका पर क्या थे आरोप 

पतेरापानी प्राइमरी स्कूल में एक शिक्षिका को लेकर गांव वालों ने मोर्चा खोल रखा था। दरअसल काफी लंबे समय से शिक्षिका पर शिक्षा के मंदिर में ऐय्याशी करने  की शिकायतें मिल रही थी । आरोप था कि स्कूल के समय वो अपने प्रेमी शिक्षक को बुलाकर एक कमरे में चली जाती है, जहां दोनों कई घंटों तक कमरे से बाहर ही नहीं निकलते थे ।  इस दौरान बच्चों की क्लास में कोई नहीं रहता। आज के बच्चे इतने भोले और नासमझ भी नहीं होते कि कमरे के भीतर क्या चल रहा है वो इतना भी ना समझ सकें । जिस शिक्षक को स्कूल में बुलाने का आरोप है, वो भी अपने स्कूल का काम धाम छोड़कर पतरापानी दौड़ा चला आता है।

शाला परिसर के अंदर कमरे में खुलेआम शिक्षक शिक्षिका द्वारा रंगरेलियां मनाए जाने से बच्चे भी हैरान थे । उन्होंने इस बात की शिकायत सबसे पहले अपने अभिभावकों से की।

प्रधान पाठक तक पहुंचा मामला

गांव के लोगों ने एकजुट होकर इस मामले की शिकायत स्कूल के प्रधानपाठक से की। अपने दायित्वों को गंभीरता से समझते हुए प्रधानपाठक ने तत्काल एक लिखित आवेदन कलेक्टर ऑफिस में जमा कराया, जिसके बाद कलेक्टर ने तुरंत इस मामले की जांच के आदेश दिए।  इस दौरान कलेक्टर के निर्देश पर बागबहरा बीईओ और एबीओ ने पतेरापानी प्राइमरी स्कूल में जाकर जांच की। स्कूल में पहुंचने के बाद सभी आरोप सही पाए गए।

प्रेमी शिक्षक-शिक्षिका पर हुई कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए महासमुंद जिला शिक्षा अधिकारी ने महिला शिक्षिका को सिविल सेवा आचरण नियम 1966 के तहत दोषी पाया। जांच के बाद आरोपी शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं प्रेमी शिक्षक को पहले ही लाइन अटैच कर दिया गया था।

प्रधानपाठक की रही सराहनीय भूमिका

इस पूरे मामले में प्रधानपाठक की सराहनीय भूमिका रही जिन्होंने अपने प्रभावशाली व्यक्तित्व और चरित्रवान होने का परिचय देते हुए पूरी ईमानदारी के साथ विभागीय जांच में सहयोग प्रदान किया और वे शिक्षा के मंदिर की पवित्रता बनाए रखने में सफल हुए ।


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